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इंदौर: सिस्टम की सुस्ती ने ली 3 जान, भागीरथपुरा में दूषित पानी का कहर; मौत के बाद जागा नगर निगम

इंदौर | स्वच्छता में सात बार नंबर वन रहने वाले शहर इंदौर से एक हृदय विदारक घटना सामने आई है। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-1 के अंतर्गत आने वाले भागीरथपुरा में दूषित पेयजल (गंदा पानी) पीने से अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।

विड़ंबना यह है कि क्षेत्र की जर्जर नर्मदा पाइप लाइन बदलने की मांग महीनों से फाइलों में दबी थी। जब तीन घरों के चिराग बुझ गए, तब जाकर आज नगर निगम के अफसरों की नींद खुली और आनन-फानन में टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
क्या है पूरा मामला?

पिछले कुछ दिनों से भागीरथपुरा के कई इलाकों (मराठी मोहल्ला, यादव कॉलोनी, भट्टा बस्ती आदि) में ड्रेनेज मिश्रित गंदा पानी सप्लाई हो रहा था। इसे पीने से सैकड़ों लोग उल्टी-दस्त के शिकार होकर बीमार पड़ गए।

* मृतकों की पहचान: मृतकों में 75 वर्षीय नंदलाल पाल समेत दो महिलाएं शामिल हैं। नंदलाल को 28 दिसंबर को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था, जिन्होंने मंगलवार सुबह दम तोड़ दिया।
* महापौर का बयान: महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मौतों की पुष्टि करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग से सटीक डेटा मांगा गया है। उन्होंने माना कि अफसरों की ओर से लाइन बदलने में देरी हुई है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फाइलों में कैद रही जनता की प्यास

सूत्रों के अनुसार, भागीरथपुरा की पाइप लाइन बदलने का प्रस्ताव साल 2024 से ही नगर निगम के दफ्तरों के चक्कर काट रहा था।

1. CM हेल्पलाइन का अनसुना: स्थानीय निवासियों और पार्षद ने सीएम हेल्पलाइन और मेयर हेल्पलाइन पर कई बार शिकायत की थी।

2. मंत्री के ऑफिस तक बिछी लाइन: नोटशीट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मंत्री जी के कार्यालय तक तो नई पाइप लाइन बिछा दी गई, लेकिन आम जनता को जर्जर और लिकेज वाली लाइन के भरोसे छोड़ दिया गया।

3. सिर्फ कागजी कार्रवाई: अफसरों ने नोटशीट पर ‘अति आवश्यक’ तो लिखा, लेकिन टेंडर को मंजूरी देने में महीनों लगा दिए।

आज हरकत में आए जिम्मेदार

आज यानी 30 दिसंबर को, जब मौत के आंकड़ों ने विभाग में हड़कंप मचाया, तब कार्यपालन यंत्री (जलप्रदाय) ने आनन-फानन में फाइल पर हस्ताक्षर कर टेंडर समिति को भेजा। यह कदम उस लापरवाही पर मुहर लगाता है, जिसके कारण निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?

स्वच्छता के मॉडल शहर में इस तरह की लापरवाही सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जब कैबिनेट मंत्री के खुद के क्षेत्र में निगम आयुक्त और अधिकारी इतने लापरवाह हैं, तो शहर के बाकी हिस्सों की क्या स्थिति होगी? स्थानीय जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि उन दोषियों पर एफआईआर और कड़ी कार्रवाई की मांग कर रही है जिनकी ‘लालफीताशाही’ ने तीन लोगों की जान ले ली।

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